इस दौरान सांसद इमरान मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी का जन्मदिन सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक उत्सव नहीं है, बल्कि संकल्प का दिन है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस अगले 100 दिनों में ब्लॉक स्तर से लेकर हर गांव तक जाएगी और लोगों से सीधा संवाद करेगी। कांग्रेस को उसके “स्वर्ण युग” में वापस लाने का संकल्प लिया गया है, जो पार्टी के गौरवशाली इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। इमरान मसूद ने MNREGA के नाम बदलने को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि MNREGA गरीब मजदूरों की रीढ़ थी, लेकिन मोदी सरकार ने धीरे-धीरे इसे खत्म करने का काम किया है। पहले केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य 10 प्रतिशत योगदान देती थी, लेकिन अब राज्यों पर 40 प्रतिशत का बोझ डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर राज्यों के पास MNREGA चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। जिसके चलते यह योजना पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों का भुगतान एक बार में छह महीने तक पेंडिंग रहता है, जिससे गरीबों की कमर टूट रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए इमरान मसूद ने कहा कि 2014 में मोदी ने MNREGA को “कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक” कहा था लेकिन COVID काल में उसी योजना ने लाखों गरीब लोगों को सहारा दिया। अब 125 दिन का रोजगार देने की बात हो रही है, लेकिन सरकार यह नहीं बता रही है कि पैसा कहां से आएगा और बढ़ती मंहगाई में मजदुर को कितनी मजदूरी मिलेगी।
इमरान मसूद ने कांग्रेस के 140 साल के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पूछते हैं कि कांग्रेस ने 70 सालों में क्या किया ? वे 1950 के आसपास भारत की हालत भूल जाते हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करते हुए इमरान मसूद कहा कि नेहरू जी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा था और हरित क्रांति, औद्योगीकरण, बड़े बांधों, बिजली परियोजनाओं और ISRO और AIIMS जैसे संस्थानों की नींव रखी थी। उन्होंने आरक्षण के ज़रिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को पूरा करने का श्रेय भी नेहरू को दिया। वहीं इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जिससे गरीबों को साहूकारों के शोषण से बचाया गया। “गरीबी हटाओ” के नारे के साथ रोज़गार पैदा करने की दिशा में काम किया। राजीव गांधी के कार्यकाल पर बात करते हुए कहा कि दलितों और वंचितों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए गए थे।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया है। जिससे शिक्षा गरीबों के लिए एक दूर का सपना बन गई है। कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के ज़रिए धीरे-धीरे आरक्षण खत्म किया जा रहा है, और देश के संसाधन कुछ दोस्तों को सौंपे जा रहे हैं। इमरान मसूद ने RSS प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म एक निजी मामला है, लेकिन सरकार देश में नफरत फैला रही है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की चुप्पी बेहद चिंताजनक है। अगर बांग्लादेश के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी है, तो पहला कदम वहां बिजली की सप्लाई रोकना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जहां हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है वहां भारत सरकार डीज़ल सप्लाई करने के लिए समझौते कर रही है। जब हिन्दुओं पर पडोसी देश में हो रहे अत्याचार को नहीं रोक पा रही है तो ऐसे में देश को विश्व गुरु बनाने का सपना कभी साकार नहीं हो सकता।
इमरान मसूद ने कहा कि अगर इंदिरा गांधी आज ज़िंदा होतीं तो वह बांग्लादेश को वही जवाब देतीं जो उन्होंने पाकिस्तान को दिया था, जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। इमरान मसूद ने मतदाता सूची और वोटर हटाने के मुद्दे पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के ज़रिए करोड़ों वोट हटाए जा रहे हैं और लाखों लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे फॉर्म-6 और ज़रूरत पड़ने पर अन्य फॉर्म जमा करके अपने वोट के अधिकार की रक्षा करें। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, इमरान मसूद ने कहा कि यहां की स्थिति बहुत दुखद है और यह सरकार की विफलता को दर्शाती है। अपने बयान के आखिर में इमरान मसूद ने प्रियंका गांधी को लंबी उम्र की शुभकामनाएं दीं और कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी को उसके शानदार अतीत में वापस लाने के लिए पूरी ताकत और लगन से लड़ेंगे। ऐसा लगता है कि यह बयान राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस और विवाद पैदा कर रहा है।

